Thursday, September 4, 2014
So it is better to look good Jai Bharat Mata
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Wednesday, August 20, 2014
काम की 10 बातें, जो रखें जीवन सुरक्षित, जानिए
राहुकाल : जब कोई कार्य पूर्ण मेहनत किए जाने के बाद भी असफल हो जाए या उस कार्य के विपरीत परिणाम जाए, तो समझ लीजिए आपका कार्य शुभ मुहूर्त में नहीं हुआ बल्कि राहुकाल में हुआ है। राहुकाल में शुभ कार्य करना वर्जित है।
क्या होता राहुकाल? : राहुकाल कभी सुबह, कभी दोपहर तो कभी शाम के समय आता है, लेकिन सूर्यास्त से पूर्व ही पड़ता है। राहुकाल की अवधि दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय) के 8वें भाग के बराबर होती है यानी राहुकाल का समय डेढ़ घंटा होता है। राहुकाल को छायाग्रह का काल कहते हैं। उक्त डेढ़ घंटा कोई कार्य न करें या किसी यात्रा को टाल दें।
कब होता है राहुकाल-
* रविवार को शाम 4.30 से 6.00 बजे तक राहुकाल होता है।
* सोमवार को दिन का दूसरा भाग यानी सुबह 7.30 से 9 बजे तक राहुकाल होता है।
* मंगलवार को दोपहर 3.00 से 4.30 बजे तक राहुकाल होता है।
* बुधवार को दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक राहुकाल माना गया है।
* गुरुवार को दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक का समय यानी दिन का छठा भाग राहुकाल होता है।
* शुक्रवार को दिन का चौथा भाग राहुकाल होता है यानी सुबह 10.30 बजे से 12 बजे तक का समय राहुकाल है।
* शनिवार को सुबह 9 बजे से 10.30 बजे तक के समय को राहुकाल माना गया है।
Wednesday, August 6, 2014
भगवान -*भग* शब्द का अर्थ करते हुए कहा गया हैं कि सम्पूर्ण ऐश्वर्य,
परमात्मा - यहां आत्मा शब्द का अर्थ जीव हैं !
परमात्मा - यहां आत्मा शब्द का अर्थ जीव हैं ! उस आत्मा (जीव) से जो श्रेष्ठ हैं, वह परमात्मा हैं ! गीता में *अक्षरादपि चोत्तमः* कहकर पुरुषोत्तम परमात्मरूप का वर्णन हैं ! सृष्टि का जो मूल कारण हैं; जिसके संसर्ग के बिना प्रकृति में सृजन-क्रिया सम्भव नहीं, उस सविशेष सर्वव्यापक चित्त -तत्त्व को *परमात्मा* कहते हैं !
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